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Sharad Purnima 2026 Live Updates: शरद पूर्णिमा पर चांद कितने बजे दिखेगा? पूजा विधि से लेकर खीर रखने तक का समय, जानिए सबकुछ

 Written By: Naveen Khantwal
 Updated : Oct 25, 2026 11:22 pm IST

Sharad Purnima 2026 Live Updates: जानिए शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा के दर्शन, खीर रखने का सही समय, मां लक्ष्मी की पूजा और इस दिन किस कथा का पाठ करना चाहिए।

शरद पूर्णिमा 2026- India TV Hindi
शरद पूर्णिमा 2026 Image Source : INDIA TV

शरद पूर्णिमा को हिंदू धर्म में बेहद खास दिन माना जाता है। साल 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जा रही है। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत सुबह 11 बजकर 57 मिनट से होगी। रात्रि के समय पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को ही है इसलिए व्रत इस दिन रखा जाएगा और रात्रि के समय माता लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा की जाएगी। ऐसे में आइए जान लेते हैं शरद पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि, कथा, खीर रखने का समय आदि। 

शरद पूर्णिमा के दिन पूजा की विधि 

  • शरद पूर्णिमा की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान-ध्यान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। 
  • पूजा स्थल की सफाई करें और यहां चौकी रखें या घर के ईशान कोण में भी आप चौकी रख सकते हैं। 
  • चौकी पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर रखें। 
  • पूजा के लिए रोली, चंदन, पीले/लाल फूल, अक्षत, दीप, पान, सुपारी, फल आदि भी आपको रखने चाहिए। 
  • सबसे पहले गणेश जी की वंदना करें। इसके बाद माता लक्ष्मी के मंत्रों का जप करें। 
  • माता लक्ष्मी के भोग के लिए इस दिन खीर अवश्य बनाएं। 
  • अब शरद पूर्णिमा की कथा का पाठ करें। 
  • अंत में माता लक्ष्मी की आरती भी आपको अवश्य पढ़नी चाहिए। 
  • इसके बाद खीर को प्रसाद के रूप में वितरित आप कर सकते हैं। 
  • शरद पूर्णिमा की मुख्य पूजा सूर्यास्त के बाद की जाती है, हालांकि आप सुबह और शाम दोनों समय पूजा कर सकते हैं। 

शरद पूर्णिमा शुभ पूजन मुहूर्त 

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:56 मिनट से 05:46 मिनट तक
  • सायाह्न सन्ध्या मुहूर्त: शाम 06:09 मिनट से 07:24 मिनट तक
  • अमृत काल : शाम 05:05 मिनट से 06:36 मिनट तक
  • निशीथ काल में माता लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त: रात 11:40 बजे से रात 12:31 बजे तक

शरद पूर्णिमा को कोजागर पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

भारत के कुछ राज्यों में शरद पूर्णिमा को कोजागर या कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। खासकर पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में शरद पूर्णिमा को कोजागर पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा-आराधना भक्तों के द्वारा की जाती है। कोजागरी का अर्थ होता है- कौन जाग रहा है? मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि में माता लक्ष्मी संसार में भ्रमण हेतु निकलती हैं और जो भी भक्त उन्हें जागता हुआ मिलता है देवी मां उसको शुभ फल प्रदान करती है और धन-धान्य से भक्त को संपन्न करती हैं। रात्रिकाल में जागरण करने के कारण ही इस शरद पूर्णिमा का नाम कोजगारी पूर्णिमा भी है। 

Sharad Purnima 2026 Live Updates: शरद पूर्णिमा आज, जानें पूजा विधि, कथा, खीर रखने का समय

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  • 11:02 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    साल 2027 में शरद पूर्णिमा कब है?

    साल 2027 में शरद पूर्णिमा 14 अक्टूबर 2027 को है। 

  • 10:34 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा की रात करें विष्णु मंत्रों का जप

    • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
    • ॐ नमो नारायणाय।
    • ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।
  • 10:16 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा की रात श्री सूक्त का पाठ करने से क्या होता है?

    शरद पूर्णिमा की रात में श्री सूक्त का पाठ करने से माता लक्ष्मी की कृपा भक्तों को प्राप्त होती है। धन, वैभव और पारिवारिक जीवन में खुशियां श्री सूक्त का पाठ करने से प्राप्त हो सकती हैं। 

  • 9:57 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा की रात में शिव मंत्रों के जप से मिलेगी भय-रोग से मुक्ति

    शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होते हैं। इस रात को चंद्रमा के साथ ही चंद्र देव के आराध्य शिव जी के मंत्रों का जप करने से भी भक्तों का कल्याण हो सकता है। इन मंत्रों का जप करने से भय-रोग से आप मुक्त हो सकते हैं। 

    • ॐ नमः शिवाय।
    • ॐ नमो भगवते रुद्राय।
    • ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात।
    • ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।
  • 9:30 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा की रात करें लक्ष्मी चालीसा का पाठ

    ॥दोहा॥

    मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।

    मनोकामना सिद्घ करि, परुवहु मेरी आस॥

    सोरठा 

    यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।
    सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥

    ॥चौपाई॥

    सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही॥

    श्री लक्ष्मी चालीसा

    तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
    जय जय जगत जननि जगदम्बा । सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥
    तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥
    जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥
    विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥
    केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
    कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥

    ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥
    क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
    चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥
    जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
    स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
    तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
    अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥

    तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥
    मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांछित फल पाई॥
    तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
    और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥
    ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥
    त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥

    जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
    ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥
    पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
    विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥

    पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
    सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥
    बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
    प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥
    बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
    करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥

    जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥
    तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥
    मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥
    भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥

    बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥
    नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥
    रूप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
    केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥

    ॥दोहा॥

    त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास। जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥
    रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर। मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥

  • 8:53 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा की रात योग-ध्यान करना क्यों होता है शुभ?

    • इस दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होते हैं। 
    • योग-ध्यान करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। 
    • सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। 
    • आध्यात्मिक जागरण संभव है।
  • 8:32 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    चंद्रमा की 16 कलाएं

    • अमृता (अमृत): चंद्रमा की इस कला को जीवन देने वाला और अमृत्व का प्रतीक माना जाता है।
    • मानदा (मनदा): इस कला को शीतलता और खुशी देने वाला माना जाता है।  जो मन को प्रसन्नता और शीतलता देती है।
    • पूषा (पुष्प): ऊर्जा और पोषण का प्रतीक इस कला को माना जाता है।  
    • पुष्टि: चंद्रमा की यह कला तन और मन को ताकत देने वाली कला। 
    • तुष्टि: संतुष्टि और मन की शांति देने वाली कला।
    • रति: चंद्र देव की इस कला को आकर्षण और प्रेम का प्रतीक। 
    • धृति: संयम और धैर्य प्रदान करने वाली कला। 
    • शशिनी (शाशनी): प्रकाश और ज्ञान देने वाली कला। 
    • चंद्रिका: चंद्र देव की यह कला शीतलता और कोमलता देने वाली कला। 
    • कान्ति: व्यक्तित्व को चमकाने वाली कला। 
    • ज्योत्स्ना: चंद्रमा की यह कला सकारात्मक ऊर्जा देने वाली कला।
    • श्री: समृद्धि और ऐश्वर्य का प्रतीक। 
    • प्रीति: स्नेह प्रदान करने वाली कला। 
    • अंगदा: यह कला शारीरिक शक्ति देने वाली मानी जाती है। 
    • पूर्णामृता (पूर्ण): परिपूर्णता प्रदान करने वाली कला। 
  • 8:23 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा की अगली सुबह करें ये काम

    शरद पूर्णिमा का व्रत 25 अक्टूबर को रखा गया लेकिन पूर्णिमा तिथि 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। ऐसे में नीचे दिए गए कार्य आपको 26 अक्टूबर को करने चाहिए।

    • पवित्र नदियों में स्नान करें या नहाने के जल में गंगाजल मिलाएं। 
    • सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंद लोगों को धन, अन्न, वस्त्र का दान करें। 
    • धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करें। 
    • सुबह माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने के बाद खुद भी खीर खाएं। 
  • 8:00 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा की रात करें कनकधारा स्तोत्र का पाठ

    कनकधारा स्तोत्र (Kanakdhara Stotra)

    अंगहरे पुलकभूषण माश्रयन्ती भृगांगनैव मुकुलाभरणं तमालम।
    अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया:।।

    मुग्ध्या मुहुर्विदधती वदनै मुरारै: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।
    माला दृशोर्मधुकर विमहोत्पले या सा मै श्रियं दिशतु सागर सम्भवाया:।।

    विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षमानन्द हेतु रधिकं मधुविद्विषोपि।
    ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्द्धमिन्दोवरोदर सहोदरमिन्दिराय:।।

    आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दम निमेषमनंगतन्त्रम्।
    आकेकर स्थित कनी निकपक्ष्म नेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजंगरायांगनाया:।।

    बाह्यन्तरे मधुजित: श्रितकौस्तुभै या हारावलीव हरि‍नीलमयी विभाति।
    कामप्रदा भगवतो पि कटाक्षमाला कल्याण भावहतु मे कमलालयाया:।।

    कालाम्बुदालिललितोरसि कैटभारेर्धाराधरे स्फुरति या तडिदंगनेव्।
    मातु: समस्त जगतां महनीय मूर्तिभद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनाया:।।

    प्राप्तं पदं प्रथमत: किल यत्प्रभावान्मांगल्य भाजि: मधुमायनि मन्मथेन।
    मध्यापतेत दिह मन्थर मीक्षणार्द्ध मन्दालसं च मकरालयकन्यकाया:।।

    दद्याद दयानुपवनो द्रविणाम्बुधाराम स्मिभकिंचन विहंग शिशौ विषण्ण।
    दुष्कर्मधर्ममपनीय चिराय दूरं नारायण प्रणयिनी नयनाम्बुवाह:।।

    इष्टा विशिष्टमतयो पि यथा ययार्द्रदृष्टया त्रिविष्टपपदं सुलभं लभंते।
    दृष्टि: प्रहूष्टकमलोदर दीप्ति रिष्टां पुष्टि कृषीष्ट मम पुष्कर विष्टराया:।।

    गीर्देवतैति गरुड़ध्वज भामिनीति शाकम्भरीति शशिशेखर वल्लभेति।
    सृष्टि स्थिति प्रलय केलिषु संस्थितायै तस्यै ‍नमस्त्रि भुवनैक गुरोस्तरूण्यै ।।

    श्रुत्यै नमोस्तु शुभकर्मफल प्रसूत्यै रत्यै नमोस्तु रमणीय गुणार्णवायै।
    शक्तयै नमोस्तु शतपात्र निकेतानायै पुष्टयै नमोस्तु पुरूषोत्तम वल्लभायै।।

    नमोस्तु नालीक निभाननायै नमोस्तु दुग्धौदधि जन्म भूत्यै ।
    नमोस्तु सोमामृत सोदरायै नमोस्तु नारायण वल्लभायै।।

    सम्पतकराणि सकलेन्द्रिय नन्दानि साम्राज्यदान विभवानि सरोरूहाक्षि।
    त्व द्वंदनानि दुरिता हरणाद्यतानि मामेव मातर निशं कलयन्तु नान्यम्।।

    यत्कटाक्षसमुपासना विधि: सेवकस्य कलार्थ सम्पद:।
    संतनोति वचनांगमानसंसत्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे।।

    सरसिजनिलये सरोज हस्ते धवलमांशुकगन्धमाल्यशोभे।
    भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम्।।

    दग्धिस्तिमि: कनकुंभमुखा व सृष्टिस्वर्वाहिनी विमलचारू जल प्लुतांगीम।
    प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथ गृहिणी ममृताब्धिपुत्रीम्।।

    कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरां गतैरपाड़ंगै:।
    अवलोकय माम किंचनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयाया : ।।

    स्तुवन्ति ये स्तुतिभिर भूमिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्।
    गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते बुधभाविताया:।।

  • 7:45 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा की रात में चंद्रमा का ये उपाय धन लाभ

    शरद पूर्णिमा की रात निशिता काल (रात 11:40 बजे से लेकर 12:31 बजे तक) में चंद्र ग्रह के मंत्र 'ॐ सोम सोमाय नमः' या फिर 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः' का जप करें। ऐसा करने से धन लाभ के योग बनेंगे साथ ही आपको मानसिक शांति भी प्राप्त हो सकती है। 

  • 7:26 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा का भगवान कृष्ण से क्या संबंध है?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात को भगवान कृष्ण ने महारास या रासलीला की थी और इसीलिए शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण और राधा रानी के महारास को देखने के लिए चंद्र देव भी आकाश में ठहर गए थे। शरद पूर्णिमा की रात में निधिवन और बांके बिहारी मंदिर में विशेष उत्सव किया जाता है। 

  • 7:02 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा किस राशि में रहेंगे?

    शरद पूर्णिमा की रात 7 बजकर 22 मिनट तक चंद्रमा मीन राशि में रहेंगे और उसके बाद मेष राशि में गोचर कर जाएंगे। 

  • 6:40 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा की रात जागरण करने से क्या होता है?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। ऐसे में जो भक्त शरद पूर्णिमा की रात जागरण करते हैं और माता लक्ष्मी का ध्यान करते हैं उनपर माता की कृपा बरसती है। मां की कृपा पाकर भक्तों के दुख-दर्द दूर होते हैं और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। 

  • 6:16 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा की रात करें इन चंद्र मंत्रों का जप, पाएंगे मानसिक शांति और पारिवारिक जीवन में सुख

    • ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः ।
    • ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः ।
    • ॐ सों सोमाय नमः।
    • ॐ अमृतांगाय विद्महे कलारूपाय धीमहि, तन्नः सोमः प्रचोदयात्।
  • 5:56 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर को कब खाना चाहिए?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर को अगले दिन सूर्योदय के बाद खाना चाहिए। सूर्योदय से पहले स्नान-ध्यान करना चाहिए और इसके बाद माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। खीर को कुछ हिस्सा माता लक्ष्मी को भोग स्वरूप अर्पित करना चाहिए और उसके बाद खुद इस खीर को खाना चाहिए। 

  • 5:12 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा को देखने का सबसे शुभ मुहूर्त और खीर रखने का समय

    • निशिता काल: रात 11:40 बजे से लेकर 12:31 बजे तक

    आपको बता दें कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रोदय शाम 4 बजकर 56 मिनट पर हुआ था लेकिन चंद्र दर्शन और खीर रखने के लिए सबसे शुभ मुहूर्त निशिता मुहूर्त ही रहेगा। 

  • 4:47 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए करें 4 काम

    • कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें 
    • माता को खीर का भोग लगाएं
    • माता को गुलाब के फूल अर्पित करें 
    • घर में चौमुखी घी का दीपक जलाएं
  • 4:19 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा पर शहर के अनुसार चंद्रोदय का समय

    दिल्ली: शाम 5:00 बजे
    मुंबई: शाम 5:28 बजे
    लखनऊ: शाम 4:47 बजे
    कानपुर: शाम 4:50 बजे
    प्रयागराज: शाम 4:45 बजे
    वाराणसी: शाम 4:40 बजे
    पटना: शाम 4:31 बजे
    कोलकाता: शाम 4:21 बजे
    जयपुर: शाम 5:06 बजे
    भोपाल: शाम 5:05 बजे
    इंदौर: शाम 5:12 बजे
    नोएडा: शाम 5:00 बजे
    बेंगलुरु: शाम 5:15 बजे
    अहमदाबाद: शाम 5:25 बजे
    चंडीगढ़: शाम 4:59 बजे
    चेन्नई: शाम 5:04 बजे

  • 3:53 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा की रात करें माता लक्ष्मी के इन 3 मंत्रों का जप, धन-धान्य की होगी प्राप्ति

    • ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
    • ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
    • ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:।
  • 3:20 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने का समय

    शरद पूर्णिमा की रात आप 10 बजकर 32 मिनट से 12 बजकर 22 मिनट के बीच चंद्रमा की रोशनी में खीर रख सकते हैं। 

  • 2:57 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा व्रत की कथा

    एक व्यापारी की दो बेटियां थीं। दोनों बहनें धार्मिक स्वभाव की थी, लेकिन बड़ी वाली बेटी धार्मिक रीति-रिवाजों में बहुत आगे थी। दोनों रोज भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करती थीं और पूर्णिमा का उपवास भी रखती थीं। 

    शादी के बाद भी दोनों ने पूर्णिमा की व्रत जारी रखा, लेकिन छोटी बेटी के व्रत पूरा नहीं रखती थी। जिसकी वजह से उसे पूरी तरह से व्रत का पुण्य फल नहीं मिल पाता था। बड़ी बेटी ने अपनी पूरी श्रद्धा से व्रत पूर्ण किया, जिससे उसे पुत्र की प्राप्ति हुई। हालांकि, नियम से पूर्णिमा के व्रत करने के कारण छोटी बेटी ने भी संतान की सुख पाया, लेकिन उसकी संतान दीर्घायु नहीं होती थी और जन्म के कुछ दिन बाद उसकी संतान की मृत्यु हो जाया करती थी।  

    अपने इस दुख का कारण जानने के लिए उसने एक महात्मा से बात की। महात्मा ने उसे बताया तुम्हारा मन पूरी तरह से ईश्वर भक्ति में नहीं लगता है, जिसके कारण तुम्हें तकलीफ भोगनी पड़ रही है। इस दुख का निवारण पूछने पर महात्मा ने उसे शरद पूर्णिमा का व्रत पूरे विधि विधान के साथ करने के लिए कहा। महात्मा की बात सुनकर छोटी बहन ने पूर्णिमा का व्रत पूरे विधि-विधान के साथ पूरा किया, लेकिन उसकी संतान जीवित नहीं बची। जब वह पुत्र को खोने का संताप कर रही थी, तभी उसकी बड़ी बहन आई। 

    मौसी के वस्त्र छूने ने छोटी बहन की संतान जीवित हो उठी।  यह देख छोटी बहन खुश हुई और खुशी से रोने लगी, तब बड़ी बहन ने उसे व्रत की महिमा बताई। इसके बाद छोटी बहन ने पूरे विधि-विधान के साथ शरद पूर्णिमा का व्रत किया और दूसरों को भी व्रत करने की सलाह दी। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा का व्रत करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। इससे आपको सभी कार्यों में सफलता हासिल होती है। 

  • 2:37 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा पूजा सामग्री

    लक्ष्मी जी की मूर्ति
    चंदन
    अक्षत
    दीपक
    धूप
    नैवेद्य
    कलश
    रोली
    फूल
    कलश में रखने के लिए पांच तरह के अनाज
    दही, शहद
    गंगाजल
    सिक्के, मौली
    आम का पत्ता, नारियल

     

  • 1:24 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    चंद्र देवता की आरती

    ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।
    दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी।
    ॐ जय सोम देवा।।
    रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी।
    दीन दयाल दयानिधि, भव बंधन हारी।
    ॐ जय सोम देवा।। 
    जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
    सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि।
    ॐ जय सोम देवा।। 
    योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें।
    ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, संत करें सेवा।
    ॐ जय सोम देवा।।वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी।
    प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी।
    ॐ जय सोम देवा।। 
    शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी।
    धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे।
    ॐ जय सोम देवा।। 
    विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी।
    सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें।
    ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।

  • 12:34 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा के दिन करें माता लक्ष्मी की आरती

     

    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
    उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
    सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    दुर्गा रूप निरंजनी, सुख-संपति दाता।
    जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    तुम ही पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता।
    कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भव निधि की त्राता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    जिस घर तुम रहती हो, तांहि में हैं सद्गुण आता।
    सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता।
    खान पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता।
    रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।
    उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

  • 11:51 AM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा व्रत में क्या खा सकते हैं?

    शरद पूर्णिमा व्रत में फलाहार ले सकते हैं। लेकिन अन्न का सेवन भूलकर भी नहीं करना है। आप दूध, दही, आलू, टमाटर, फल, पनीर इत्यादि चीजों का सेवन कर सकते हैं।

  • 11:25 AM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा पूजा विधि

    • शरद पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
    • फिर एक कलश लें और उसमें पांच तरह के अनाज, थोड़ा गंगाजल, सिक्के, मौली, दही, शहद, आम का पत्ता और नारियल रखें।
    • कलश को जल से भरें और उस पर आम के पत्ते लगाएं।
    • फिर एक लाल वस्त्र पर माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें।
    • माता के सामने दीपक जलाएं।
    • इसके बाद माता को फूल, अक्षत, रोली, चंदन आदि अर्पित करें।
    • फिर माता को खीर, फल और मिठाई का भोग लगाएं।
    • अंत में माता की आरती करें।
    • इसके बाद रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें। फिर खीर को पूरी रात चांद की रोशनी के नीचे रहने दें।
    • अगले दिन खीर को प्रसाद रूप में ग्रहण करें।
  • 10:07 AM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा की खीर खाने के लाभ

    शरद पूर्णिमा की खीर खाने से विशेष रूप से चर्म रोगियों को फायदा होता है। इसके अलावा ये खीर आंखों की रोशनी बढ़ाने का भी काम करती है। ऐसा भी कहा जाता है कि जो कोई प्रसाद रूप में इस खीर का सेवन करता है उसके जीवन में धन की कभी कमी नहीं होती है।

  • 8:59 AM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा के दिन खुले आसमान के नीचे क्यों रखी जाती है खीर?

    मां लक्ष्मी को चावल की खीर बेहद प्रिय है। वहीं, चंद्रमा का सफेद रंग से गहरा संबंध है। इसलिए मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाते हैं। इसके लिए ज्योतिष सफेद रंग की चीजों का दान करने की सलाह देते हैं। शरद पूर्णिमा की रात देवी मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती हैं। इस दौरान मां व्यक्ति विशेष के कर्मों का अवलोकन करती हैं। वहीं, चांद की रोशनी में खीर रखने से खीर अमृत तुल्य हो जाता है। इसे अगले दिन पूजा के समय भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है। इसके बाद सपरिवार खीर को प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति पर देवी मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है। वहीं, मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।

  • 8:07 AM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा के दिन 16 कलाओं से युक्त होते हैं चंद्र देव

    हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का खास महत्व बताया गया है। शरद पूर्णिमा के दिन चांद अपनी 16 कलाओं से युक्त होते हैं। इसे कोजागिरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। कोजागिरी पूर्णिमा के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की  पूजा की जाती है। मां लक्ष्मी की विधिवत पूरा और व्रत रखा जाता है। इसके बाद अगले दिन सुबह व्रत का पारण किया जाता है।

  • 8:04 AM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    शरद पूर्णिमा से जुड़ी धार्मिक मान्यता

    शरद पूर्णिमा को कोजागरा या कोजागरी लक्ष्मीन्द्र पूजा के नाम से भी जाना जाता है। ये पूजा मिथिलांचल और बंगाल में अत्यंत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस पूजा को मां लक्ष्मी के संदर्भ में मनाया जाताहै। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर बैठकर आती हैं और जो व्यक्ति इस दिन रात को जागकर मां लक्ष्मी की उपासना करता है, उसके ऊपर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और घर में धन-धान्य की बढ़ोतरी होती है।

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